Sunday, March 30, 2008

माँ

जग में किसने देखा इश्वर को
आँखें खोलीं तो पहले पाया तुझको
मुझको ला कर इस संसार में
"माँ " मुझ पर तुमने उपकार किया
मुझे अपने रक्त से सींचा तुमने
मुझे साँसों का उपहार दिया
मेरे इस माटी के तन को
माँ तुमने ही आकर दिया
कैसे यह क़र्ज़ चुकाऊँ मैं
इतना तो बता दे 'राम" मेरे
पहले "माँ "का क़र्ज़ चुका लूँ
फिर आऊं मैं द्वारे तेरे

मेरी हर इच्छा को तुमने
बिन बोले ही पहचान लिया
सुख की नींद मैं सो पाऊँ
अपनी रातों को भुला दिया
मेरे गिले बिस्तर को तुमने
अपने आँचल से सुखा दिया
गर डिगा कहीं विश्वास मेरा
मुझे हौसला तुमने दिया
मुझे हर कठिनाइयों से
टकराने का साहस तुमने दिया

मेरी छोटी बड़ी सभी नादानियों को
तुमने हँसते हँसते बिसरा दिया
मेरे लड़खादाते क़दमों को तुमने
अपनी ऊँगली से थाम लिया
तेरे इस बुढापे मैं माँ अब तेरी
लाठी मैं बन जाऊं
मुझको सहारा दिया था कभी तूने
तेरा सहारा मैं बन जाऊं हर दम
फिर भी न अहसान चुका पाऊँ मैं
चाहें ले लूँ मैं कितने जनम

इस धरती पर "माँ"
इश्वर का ही रूप है
कितने बदनसीब होते हैं वे
जो ढूंढते हैं इश्वर तुझको
मन्दिर ,मअस्जिद ,गुरुद्वारों मैं
अपने घर मैं झांक तो लें
वह मिलेगा तुझे माँ की छावों मैं

ना मैं जानूँ काबा तीरथ ,
ना जानूँ हरिद्वारे ,
ना जानूँ मैं काशी ,मथुरा,
ना ही तीरथ सारे
मैं तो जानूँ " माँ " बस तुझको
सारे तीरथ बस तेरे ही द्वारे

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Saturday, March 22, 2008

कलयुग के रावण

मानव के वेश में कितने रावण छुपे
इनकी पहचान कहाँ से लाओगे ?
त्रेता युग में था बस इक रावण
जिसे मारने इक राम ने अवतार लिया
कलयुग के छुपे रावनों को मारने
इतने राम कहाँ से लओगे ?

युग बदला, दुनिया बदली,बदल गया इंसान,
प्रेम सद्भावना,इंसानियत कमतर हुई
इंसान बना फिर से हैवान,
मासूमियत को कुचला जिसने ,
कितनी कलियों को मसला जिसने,
ऐसे "मोनिन्देरों " की पहचान कहाँ से लाओगे?

छीनता रहा अगर यूं ही बचपन ,
और सहमा सा होगा हर मन
घुटटी रही'मानवता यूं ही
कैसे उपजेगा विश्वास किसी पर
विरान हो जायेगी यह धरती
इस पर बसने के लिए इंसान कहाँ से लाओगे




Friday, March 21, 2008

राष्ट्र का अभिमान हिन्दी

Sadiyon ki hai virasathttp://hindiblogs.com

Manishiyon ki hai vani

Bhartiya sabhyta ki hai atma

Jan jan ki hai pran hindi

Vishva ki sirmour hai

Desh ki shaan hai hindi

Magar phir bhi apni pehchaan ko

Apne hi ghar main pareshaan hai hindi

Baras dar bite baras

Divas dar bite divas

Phir bhi Hindi divas ko na jane kyon

Mohtaaj hai hindi

Kyon na ham nij bhasha par garv karen

Uske prayog par hum kyon sharm karen

Bhartiya sabhyta ka gaurav

Rashtra ka abhimaan hai hindi